हिम शिखर बहुत ही पावन होते , हिम शिखर बहुत ही मनभावन होते। हिम शिखर बहुत ही पावन होते , हिम शिखर बहुत ही मनभावन होते।
इसके बिना ना कोई फसल, इसके बिना ना कोई जंगल। इसके बिना ना कोई फसल, इसके बिना ना कोई जंगल।
हर्षित मन खिला हैं गुलशन आया बसंत..... हर्षित मन खिला हैं गुलशन आया बसंत.....
मत खेल प्रकृति से तू इतना... मत खेल प्रकृति से तू इतना...
तनया आई महकता आँगन घर बहार। तनया आई महकता आँगन घर बहार।
मंथन में रातें और उम्मीदों में दिन गुजरते हैं ! मंथन में रातें और उम्मीदों में दिन गुजरते हैं !